"AI-171: एक उड़ान, जो कभी मंज़िल तक न पहुंची* मौत का कहर
12 जून 2025 की दोपहर। एयर इंडिया की अंतरराष्ट्रीय उड़ान AI‑171, लंदन के लिए रवाना होने को तैयार थी। 242 लोगों की आंखों में मंज़िल के सपने थे—किसी को अपने बेटे की ग्रेजुएशन में शामिल होना था, किसी को ब्रिटेन में नौकरी जॉइन करनी थी, किसी डॉक्टर को मेडिकल कॉन्फ्रेंस में जाना था। लेकिन किसी को नहीं पता था कि ये सफर उनकी ज़िंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।
उड़ान का सपना
"मम्मी, लंदन में बहुत सर्दी होती है क्या?"—छह साल का आर्वव अपनी माँ से पूछता है। उसकी माँ—डॉ. नेहा तिवारी, गुजरात की जानी-मानी गायनोकोलॉजिस्ट—उसे प्यार से सीने से लगा लेती हैं। नेहा और उनके पति—डॉ. अमन तिवारी, दोनों मेडिकल सेमिनार में लंदन जा रहे थे, साथ में अपने दोनों बच्चों को भी ले जा रहे थे। यह उनके परिवार के लिए एक छोटा-सा छुट्टी का सफर था।
वहीं, 24 साल का विश्वास कुमार—एक ब्रिटिश नागरिक, लेकिन मूल रूप से बिहार का—अपने माता-पिता से विदा लेकर लौट रहा था। विश्वास पहली बार भारत आया था और अब अपने घर गैटविक लौट रहा था।
विमान संख्या AI‑171, उड़ान भरने के लिए तैयार था। टेकऑफ से ठीक पहले, फ्लाइट अटेंडेंट मुस्कान के साथ यात्रियों को निर्देश दे रही थीं। सब कुछ सामान्य था... या शायद नहीं।
दोपहर 1:38 बजे। विमान रनवे से हवा में उठा।
1:39 बजे—केबिन में असामान्य कंपन महसूस हुआ। कई यात्रियों ने चेहरों पर बेचैनी के भाव दिखाए।
1:40 बजे—पायलट की आवाज़ कंट्रोल टॉवर में गूंजी:
"Mayday, mayday... engine failure... losing altitude… flaps not responding... preparing emergency landing..."
मगर उसके कुछ ही सेकंड बाद, एक भयंकर आवाज़ ने पूरा शहर हिला दिया।
विमान सीधा गिरा मेघानीनगर क्षेत्र में स्थित बी.जे. मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स हॉस्टल परिसर पर। ज़ोरदार विस्फोट हुआ। आग की लपटों ने पूरे हॉस्टल को निगल लिया। आसमान में धुएं की एक काली लकीर कई किलोमीटर दूर से भी दिख रही थी।
शहर की चीख
अहमदाबाद थर्रा गया। हर तरफ आग, धुआं, चीखें और खामोशी का मिश्रण था। पास के डॉक्टर, छात्र और नागरिक हादसे के तुरंत बाद घटनास्थल पर दौड़े। मगर वहाँ कुछ था ही नहीं बचा—ना धातु का ढांचा, ना कोई मानव आकृति।
डॉक्टरों का हॉस्टल पूरी तरह जल चुका था। कई लोग जो ज़मीन पर सो रहे थे, वे चिथड़ों में बदल चुके थे। एक ही परिवार के चार डॉक्टर—पिता, माँ, और दो बच्चे—हॉस्टल में ही रहते थे; सभी की मौके पर मौत हो गई।
स्थानीय निवासी रेखा बेन कहती हैं:
"जैसे कोई बम फटा हो... मेरी खिड़की हिल गई... और फिर मैंने देखा, पूरा हॉस्टल आग की लपटों में था।"
सिर्फ एक जिंदा बचा
जब राहत दल ने मलबे को खंगालना शुरू किया, तो उन्हें एक चमत्कार मिला—एक 24 वर्षीय युवक, बेहोश लेकिन जीवित। यह था विश्वास कुमार।
उसके दोनों पैर फ्रैक्चर थे, शरीर पर जले के निशान, लेकिन उसकी सांसें चल रही थीं।
"मैं सो रहा था... अचानक झटका लगा... सीट से फेंका गया... फिर कुछ याद नहीं,"—बाद में उसने कहा।
वह एकमात्र जीवित यात्री था—241 अन्य लोग, जिनमें एयर होस्टेस, पायलट्स, बच्चे, बुज़ुर्ग, डॉक्टर, विद्यार्थी—सब कुछ उस धुएं में समा गए।
पीएम का दौरा और DNA से पहचान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं रात 7:30 बजे अहमदाबाद पहुँचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया, घायलों से मुलाकात की, और मृतकों के परिजनों को सांत्वना दी। उनके चेहरे पर भी पीड़ा साफ झलक रही थी।
DNA जांच की प्रक्रिया शुरू की गई—क्योंकि अधिकांश शव जल कर पूरी तरह क्षत-विक्षत हो चुके थे। 1000 से ज्यादा सैंपल लिए गए, जिनमें कई अब तक अज्ञात हैं।
जांच और सवाल
DGCA, Boeing, FAA, और NTSB सहित अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां मौके पर पहुंचीं। प्रारंभिक रिपोर्ट में पाया गया कि विमान टेकऑफ़ मोड में नहीं था, उसके फ्लैप्स और लैंडिंग गियर डाउन पोजीशन में थे—जो टेकऑफ़ के दौरान नहीं होना चाहिए।
क्या तकनीकी खराबी थी?
क्या मेन्टेनेंस रिकॉर्ड में छेड़छाड़ थी?
या पायलट ने इमरजेंसी में कुछ अलग निर्णय लिया?
जवाब अब तक नहीं मिला है। परंतु ब्लैक बॉक्स मिल चुका है और उसकी जांच चल रही है।
बोइंग का बयान और टाटा समूह की मदद
Boeing के CEO केली ऑर्टबर्ग ने शोक व्यक्त करते हुए कहा:
"यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस त्रासदी के हर पहलू को उजागर करें…"
टाटा समूह और एयर इंडिया ने हर मृतक के परिजनों को ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता और घायलों को मुफ्त इलाज की घोषणा की। साथ ही हेल्पलाइन नंबर 1800‑5691‑444 भी जारी किया गया।
जिन्दगी की अधूरी चिट्ठियाँ
डॉ. नेहा का बेटा आरव, जो प्लेन में था, लंदन के बर्फ देखने का सपना ही देखता रह गया।
एक नवविवाहित जोड़ा—हनीमून पर जा रहा था—उनकी कहानी उनके व्हाट्सएप चैट तक ही सीमित रह गई।
पायलट कैप्टन सोमेश की बेटी—"पापा, मेरे लिए कुछ लाना"—अब उस ड्रेस का इंतज़ार कभी नहीं करेगी।
राख से उठते सवाल
AI‑171 अब केवल एक नंबर नहीं है—यह भारत की विमानन इतिहास का सबसे भयानक पन्ना बन गया है।
241 जिंदगियों की राख अब न्याय और जवाब की मांग कर रही है। सवाल हैं—और शायद बहुत दिनों तक जवाब नहीं मिलेंगे। मगर जो बचा, वो है दर्द, खामोशी और भरोसा कि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।
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