भारत का एक ऐसा अनोखा गांव, जहां कच्चे मकानों में रहते हैं करोड़पति लोग।
Content:-
- किस राज्य में है यह अनोखा गाँव?
- किस समाज के लोग रहते हैं यहाँ?
- इस गाँव के लोगों का मुख्य भोजन क्या है?
- कच्चे मकान में क्यों रहते हैं लोग?
भारत को विविधताओं का देश कहा जाता है, दुनिया में इकलौता ऐसा देश है भारत जो अपनी सांस्कृतिक विरासत और अनोखी परंपराओं के लिए जाना जाता है। क्या आप जानते है इस विविधताओं बाले भारत में एक ऐसा गाँव भी मौजूद है, जहां अच्छे-खासे पढ़े-लिखे या कहें कि समृद्ध लोग कच्चे मकानों में रहना पसंद करते हैं। कौन-सा यह गाँव, आइए जानते हैं उस अद्भुत गाँव की पुरी कहानी।
भारत को गांवों का देश है, भारत की आत्मा गाँवों में निवास करती है। भारत के प्रत्येक प्रांत और केंद्र शासित प्रदेशों में हजारों पुराने और समृद्ध गांव देखने को मिल जाएंगे। गांव न सिर्फ भारत की सांस्कृतिक विरासत को संजोकर रखे हुए हैं, बल्कि भारत की परंपराएं और समृद्ध इतिहास भी इन्हीं गांवों से होकर गुजरते हैं, या कहें कि इन्ही गाँवों ने हमारी सांस्कृतिक विरासत को पोषित पल्लवित किया है।
आपने भारत के अलग-अलग गांवों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा गांव है, जहां आज भी कच्चे मकान बने हुए हैं। सबसे मज्जेदार बात यह है कि इन मकानों में कुछ करोड़पति लोग भी रहते हैं। कौन-सा है यह गाँव?
किस राज्य में है यह अनोखा गाँव
कौन-सा है कच्चे मकान वाला गाँव
भारत में कच्चे मकान वाला गाँव राजस्थान के ब्यावर जिले में स्थित है। इस जिले में देवमाली गाँव है, जहां लोग आज भी कच्चे मकान में रहते हैं।
किस समाज के लोग रहते हैं यहाँ?
देवमाली गांव में गुर्जर समाज के लोग रहते हैं। यह लोग यहां पर वर्षों से इसी प्रकार से मिट्टी के घरों में रह रहे हैं। ये घर पूरी तरह से मिट्टी के बने हुए हैं और इनकी छत भी कच्ची है।
इस गाँव में लोगों का मुख्य भोजन क्या है?
राजस्थान के देवमाली गांव में रहने वाले सभी लोग शाकाहारी है। ये लोग शराब का भी सेवन नहीं करते हैं।
कच्चे मकान में क्यों रहते हैं लोग?
अब सवाल है कि आखिर यहां रहने वाले लोग कच्चे मकानों में ही क्यों रहते हैं। यहां के लोग देवनारायण भगवान की अराधना करते हैं। ऐसे में एक मान्यता है कि यहां एक समय में देवनारायण भगवान लोगों की सेवा से खुश हुए और उन्होंने लोगों को आशीर्वाद देते हुए छत पक्का नहीं करने के लिए कहा था।
इसके बाद से लोगों ने यहां कच्चे मकानों में ही रहना जारी रखा। आज यहां रहने वाले लोग पढ़े-लिखे हैं, जिनके बच्चे शहरों में अच्छी नौकरी कर रहे हैं, लेकिन मान्यता के अनुसार वे मकानों को कच्चा ही रखते हैं।

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